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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

अस्ति चेदिन्द्रियाक्रान्तिः किं प्राप्यं पूजनैः फलम् । नास्तिचेदिन्द्रियाक्रान्तिः किं प्राप्यं पूजनैः फलम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि इन्द्रियों पर विजय प्राप्त कर ली गई, तो पूजनों से क्या फल प्राप्त है ? यदि इन्द्रियों पर विजय प्राप्त नहीं हुई, तो पूजनों से क्या फल प्राप्त है, यानी कुछ भी नहीं