Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 43, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 43, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 43 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
विचारोपशमाभ्यां हि न विनासाद्यते हरिः ।
विचारोपशमाभ्यां च मुक्तस्याब्जकरेण किम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
विचार ओर उपशम
के बिना पूणनिन्द आत्मा स्वतन्त्ररूप से तत्त्वतः प्राप्त नहीं होता विचार ओर उपशम से रहित
(विषयासक्त) पुरुष का ईश्वर भी क्या अप्रिय कर सकता है ?