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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

श्रीभगवानुवाच । विप्रोत्तिष्ठ पयोमध्याद्गृहाणाभिमतं वरम् । अभीप्सितफलोपेतो जातस्ते नियमद्रुमः ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीभगवान्‌ ने कहा : हे विप्र, जल के मध्य से उठो, मनमाना वर लो । तुम्हारा नियमरूपी वृक्ष अभीष्ट फल से युक्त हो गया है