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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

मायामिमां त्वद्रचितां भगवन्पारमात्मिकीम् । द्रष्टुमिच्छामि संसारनाम्नीमान्ध्यैककारिणीम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे भगवान्‌, आपसे रचित इस संसार नामक माया को, जो परमात्मा में अध्यस्त हे ओर जीवों को अन्धा बनानेवाली हे, मेँ देखना चाहता हूँ