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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

गते विष्णौ समुत्तस्थौ जलात्स ब्राह्मणेश्वरः । शीतलामलमूर्तित्वादिन्दुः क्षीरोदकादिव ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

भगवान्‌ विष्णु के चले जाने पर वह उत्तम ब्राह्मण शीतल ओर निर्मल मूर्ति होने के कारण क्षीरसागर से चन्द्रमा के समान जल से उठा