Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
बभूव परितुष्टात्मा दर्शनेन जगत्पतेः ।
दर्शनस्पर्शनैरिन्दोरुत्फुल्लमिव कैरवम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
वह
चन्द्रमा के दर्शन और स्पर्श से विकसित कमल की भाँति त्रिलोकी के अधिपति भगवान् के दर्शन से
बहुत प्रसन्न हुआ