Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अन्यैः पार्श्वगतैर्दीनैः स्रवदश्रुमुखैर्जनैः ।
श्रितं गलदवश्यायैः शुष्कपर्णैरिव द्रुमम् ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे ओस बहा रहे सूखे पत्तों से वृक्ष परिवेष्टित होता है वैसे ही
पास में बैठे हुए दुःखी अश्रु धारा बहा रहे अन्यान्य लोगों से वह परिवेष्टित था