Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
वियोगभीत्या संयोगपरिहारपरैरिव ।
दूरं विप्रसृतैरङ्गैरनात्मीयैरिवावृतम् ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
वियोग के भय से
मानों संयोग का त्याग कर रहे अतएव दूर हटे हुए हाथ, पैर आदि अंगों से अनात्मीयजनों की भाँति वह
आवृत था