Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
अस्त्यस्मिन्वसुधापीठे कोसलो नाम मण्डलः ।
कल्पवृक्षवनं मेराविव रत्नगणाकरः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरु
पर्वत पर कल्पवृक्ष वन के समान इस पृथिवी तल में कोशलनामक विविध रत्नों का भंडार भूत देश
है