Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
तत्राभूद्ब्राह्मणः कश्चिद्गुणी गाधिरिति श्रुतः ।
परमश्रोत्रियो धीमान्धर्ममूर्तिरिव स्थितः ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर गाधि नाम से प्रख्यात कोई गुणवान ब्राह्मण हुआ । वह परम श्रोत्रिय, धीमान् ओर
मूर्तिमान् धर्म-सा था