Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 44, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 44, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 44 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
बान्धवाक्रन्दसंरम्भकोलाहलगता गिरः ।
स्नेहभावविचारार्थं श्रृण्वन्तमिव यत्नतः ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
बान्धवों के रोने
पीटने के कोलाहल से मिली हुई वाणियों को, किसका मेरे प्रति अधिक स्नेह ओर किसका कम यों
विचार करने के लिए, मानों, यत्न से सुन रहा था