Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

विश्रान्तं वनकुञ्जेषु सुप्तं गिरिदरीषु च । निलीनं पत्रपुञ्जेषु गुल्मकेषु कृतालयम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

वह वन के कुजं में विश्राम करता था, पर्वत की गुफाओं मेँ सोता था, पत्तों की ओट में छिपा रहता था, बड़ी-बड़ी झाड़ियों को उसने अपना निवास स्थान बना रक्खा था