Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
किंकिरातावतंसाढ्यं यूथिकास्त्रग्विभूषितम् ।
केतकोत्तंससुभगं सहकारस्रगाकुलम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह किंकिरात की मंजरियों के कर्ण भूषणो से अलंकृत
रहता था, जूही की मालाओं से विभूषित रहता था, केवड़े के कर्णपूरो से बड़ा सुन्दर लगता था ओर
आम के बौरों की माला से आच्छन्न रहता था