Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
प्रसूतमथ शैलेषु पुत्रान्निजकुलाङ्कुरान् ।
अत्यन्तविषमोदन्तान्खदिरः कण्टकानिव ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जैसे खैर काँटों को पैदा करता है वैसे ही उसने वनों में अपने कुल के अंकुररूप
पुत्रों को, जिनके चरित्र अत्यन्त विषम (श्रवण के भी अयोग्य) थे, उत्पन्न किया