Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
कलत्रवन्तं संपन्नं स्थितं प्रक्षीणयौवनम् ।
शनैर्जर्जरतां यातं वृष्टिहीनमिव स्थलम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले वह स्त्री-
पुत्र आदि परिवारवाला हुआ, उसके वाद उसका यौवन क्षीण हो गया, तदनन्तर वृष्टि रहित भमि की
तरह धीरे-धीरे जर्जर हो गया