Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
प्रौढं श्वपचगार्हस्थ्यं कुर्वाणं बहुबान्धवम् ।
क्रूरनामार्थवचनं परां वृद्धिमुपागतम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
वह बड़ प्रौढ था, चाण्डाल की गृहस्थी कर रहा था, उसके बहुत से बन्धु बान्धव थे,
नाम, कर्म ओर वचन बड़े क्रूर थे ओर वह बहुत बड़ी कुटुम्ब वृद्धि को प्राप्त हुआ था । उसने अपने को
इस प्रकार देखा