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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 18

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

जराजरठतां यातं स्वदेहसमपुत्रकम् । जीर्णंप्रायरसश्वभ्रतमालतरुसंनिभम् ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

वह जरा से अत्यन्त जर्जरता को प्राप्त हो गया । अपने शरीर के समान प्रमाणवाले उसके लड़के थे, वह गड्ढे में उत्पन्न सुखे हुए तमाल वृक्ष के सदृश था