Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
आलोकयन्तमादाय तं करेण स वारणः ।
स्वकटेऽयोजयन्मेरुस्तटेऽर्कमिव सादरम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
उस हाथी ने देख रहे उस चाण्डाल को अपनी सूँड़ से पकड़कर जैसे मेरू अपने तट पर सूर्य को संलग्न
करता है वैसे ही बड़े आदर के साथ उसको अपने गण्डस्थल पर चढ़ाया