Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
पूरिताशो बभौ राजा जयतीति जनस्वनः ।
उदभूत्संप्रबुद्धानां विहगानामिवारवः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
मनोरथो को पूर्ण करनेवाला राजा सुशोभित हुआ | तदनन्तर जागे
हुए पक्षियों की ध्वनि के समान राजा की जय हो, इस प्रकार की जनध्वनि उत्पन्न हुई, जिसने दिशाओं
को भर दिया था