Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
उदभूद्बन्दिवृन्दानां घनकोलाहलस्ततः ।
वेलाविलुलिताम्बूनामम्बुधीनामिव ध्वनिः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद सागरो की, जिनका जल तटों से टकराया हो, ध्वनि के समान
बन्दिवृन्दों का तुमुल कोलाहल हुआ