Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
तं तत्रावरयामासुर्मण्डनार्थं वराङ्गनाः ।
क्षीरोदगतविभ्रान्ता लहर्य इव मन्दरम् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
क्षीरसागर के मन्थन से जनित क्षोभ से घूम रही लहरियों ने
जैसे मन्दराचल को परिवेष्टित किया था वैसे ही सुन्दर-सुन्दर ललनाओं ने, अलंकृत करने के लिए,
उसे घेर लिया