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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

संपन्नं श्वपचागारे शिशुं श्वपचवल्लभम् । इतश्चेतश्च गच्छन्तमुत्पीडमिव यामुनम् ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

चाण्डालो के घर में उत्पन्न हुआ ओर चाण्डालो का अत्यन्त प्रिय शिशुरूप इधर-उधर चल रहा वह यमुना प्रवाह में गिरे हुए कर्णभूषणरूप नील कमल के समान था