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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 45, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 45, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 45 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

सारमेयपरीवारं विहरन्तं वनाद्वनम् । निघ्नन्तं मृगलक्षाणि पौलिन्दीं स्थितिमागतम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

शिकार खेलने के लिए कुत्तों से परिवृत होकर एक वन से दूसरे वन में विहार कर रहा, लाखों मृगों को मार रहा वह व्याधों की अवस्था को प्राप्त हुआ था