Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
नृपोऽवधीरयामास तां तां श्वपचसंकथाम् ।
वृक्षाग्रगतमार्जारफेत्कारं मृगराडिव ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वृक्ष की चोटी पर बैठी हुई बिल्ली के फुफकार का सिंह तिरस्कार
करता है वैसे ही राजा ने चाण्डाल के संभाषण का तिरस्कार किया