Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
पद्मास्तुषारप्रावृष्ट्या ग्रामाः सावग्रहा इव ।
दाववन्त इवाद्रीन्द्रा नागरा न विरेजिरे ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे तुषार से भरनेवाली वृष्टि से कमल शोभित नहीं होते और जैसे
उत्पातों से युक्त ग्राम शोभित नहीं होते और जैसे वनाग्नि से भरे हुए पर्वत शोभित नहीं होते वैसे ही वे
नागरिक शोभित नहीं हुए