Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
सर्वावयवविश्रान्तां म्लाननामयमाययौ ।
जानुस्तम्भान्तरमहारन्ध्राग्निरिव दुर्द्रुमः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
जिसके तने के बड़े खोखले में अग्नि लगी हो ऐसे सेमल आदि का वृक्ष जैसे
म्लानता को प्राप्त होता है वैसे ही वह सब अवयवा में भीनी हुई म्लानता को प्राप्त हुआ