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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

अनानन्दमुखं श्यामं शरीरं श्रीविवर्जितम् । दग्धं स्थलमिवैनं ते बह्वमन्यन्त नाकुलाः ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे दुःखी अत्यन्त स्नेहवाली ललनाएँ शव का दूर से ही त्यागकर देती हैं ऐसे ही सेवकों ने असत्कृत उसका दूर से ही त्याग कर दिया ॥ २ ३॥ उसके मुँह पर आनन्द की रेखा भी न थी, शरीर काला पड़ गया था, शोभा ने तो उसका सर्व त्याग कर दिया था, इसलिए वह श्मशान भूमि के समान था । दुःखी नागरिकों ने उसका कुछ भी सम्मान नहीं किया