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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

धूमायमानदेहस्य परितापदशावती । नाढौकतास्य जनता पार्श्वमग्निर्गिरेरिव ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

उसका शरीर धुएँ के समान मैला था। जैसे पर्वत के शिलामय प्रदेश के समीप अग्नि नहीं जाती वैसे ही परिताप दशावाली जनता उसके समीप नहीं गई