Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verses 34–36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verses 34–36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
अग्निकुण्डप्रविष्टानां मन्त्रिणां भृत्यरोदनैः ।
रुदत्क्रन्ददृढतरमरण्यमिव मारुतैः ॥ ३४ ॥
चितादीपितविप्रेन्द्रमांसमांसलगन्धया ।
जातनीहारमुत्पातवात्ययावकरोद्धतैः ॥ ३५ ॥
वातदीर्घवसागन्धदूरानीतखगोर्जितैः ।
चक्रैर्व्योभाभवच्छन्नभास्करं जलदैरिव ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
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