Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
अलक्षितगृहं चौरलुण्ठिताखिलसंचयम् ।
त्यक्तपुत्रकलत्रं तन्मरणव्यग्रनागरम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर उन्मत्त चोर लुटेरों द्वारा आभूषण आदि
के हरण के समय बालक और कुमार रो और काँप रहे थे, भयभीत नागरिकों ने अपने जीवन और नाम
का त्याग कर दिया था एवं किसी प्रकार की मर्यादा नहीं रह गई थी ॥ ३ ८॥ उस नगर में घर नहीं दिखाई
देते थे, चोरों ने सब धनसंचय लूट लिया था, लोगों ने अपने पुत्र-कलत्र का त्याग कर दिया था और
मरने के लिए सब नगरवासी व्यग्र थे