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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 46, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 46, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 46 · श्लोक 46

संस्कृत श्लोक

श्रीवाल्मीकिरुवाच । इत्युक्तवत्यथ मुनौ दिवसो जगाम सायंतनाय विधयेऽस्तमिनो जगाम । स्नातुं सभा कृतनमस्करणा जगाम श्यामाक्षये रविकरैश्च सहाजगाम ॥ ४६ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : मुनि महाराज के ऐसा कहने पर दिन बीत गया, सूर्य भगवान्‌ अस्ताचलावलम्बी हो गये और सभा मुनिजी को नमस्कार कर सायंकाल की विधि के लिए स्नानार्थ चली गई और दूसरे दिन रात्रि बीतने पर सूर्य की किरणों के साथ फिर आ गयी