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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

नित्यमेवमनन्तासु भ्रान्तिदृष्टिषु देहिनाम् । चेतो भ्रमति शार्दूलो वनराजिष्विवोन्मदः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे मदोन्मत्त सिंह वनराजियों में घूमता है वैसे ही यह प्राणियों का चित्त अनन्त भ्रान्तियों में नित्य घूमता है