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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

तं पप्रच्छातिथिं गाधिः प्रसङ्गपतितं वचः । किं ब्रह्मन्सुकृशाङ्गस्त्वं किमिति श्रमवानसि ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

गाधि ने बातचीत के सिलसिले में उस अतिथि से पूछा कि ब्रह्मन्‌, आप क्यों कृश हैं और क्यों थके हैं ?