Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
अतिथिरुवाच ।
ममातिकार्श्यश्रमयोर्भगवन् श्रृणु कारणम् ।
कथयामि तथाभूतं वयं नासत्यवादिनः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
अतिथि ने कहा :
भगवान्, मेरी अत्यन्त कृशता और श्रम का कारण सुनिये । हम लोग असत्यवादी नहीं हैं, जो वास्तव
बात है, उसे मैं आपसे कहता हूँ