Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
एकदैकेन तत्रोक्तं कथाप्रस्तावतः क्वचित् ।
इहाभूच्छ्वपचो राजा वर्षाण्यष्टौ द्विजेति मे ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर कहीं एक समय एक ने कथा के सिलसिले में मुझसे कहा : हे द्विज, यहाँ पर आठ वर्ष
चाण्डाल राजा हुआ