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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verses 29–30

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verses 29–30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

कृत्वा चान्द्रायणस्यान्ते तृतीयस्याद्य पारणम् । इहाहमागतस्तेन श्रान्तोस्म्यतिकृशोस्मि च ॥ २९ ॥ श्रीवसिष्ठ उवाच । इति श्रुतवता तेन गाधिना स तदा द्विजः । भूयः पृष्टोऽप्येतदेव कथयामास नान्यथा ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

आज तीसरे चान्द्रायण के बाद पारणा करके मैं यहाँ आया हूँ, इसी कारण मैं थका हूँ और अत्यन्त कृश हूँ