Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
इति तेषां मुखाच्छ्रुत्वा तस्मान्निर्गत्य मण्डलात् ।
प्रयागेऽकरवं शुद्ध्यै प्रायश्चित्तमहं द्विज ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे विप्र, उनके मुख से यह सुनकर उस देश से बाहर
निकलकर मैंने शुद्धि के लिए प्रयाग में प्रायश्चित्त किया