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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

सोऽयमन्ते परिज्ञातः प्रविष्टो ज्वलनं जवात् । ततो द्विजशतानीह प्रविष्टानि हुताशनम् ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

वह अन्त में जाना गया और शीघ्र अग्नि में प्रविष्ट हो गया । उससे सैकड़ों ब्राह्मणों ने यहाँ पर अग्नि में प्रवेश किया