Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
यद्बन्धुमध्ये मरणं मया तद्दृष्टमात्मनः ।
सा मायैव न संदेहः शेषं पश्यामि तस्य तम् ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
जो मैंने बन्धुओं के बीचमें अपना वह मरण देखा वह तो निःसन्देह माया ही है उसमें संवाद अर्थात्
सत्यत्व देखा नहीं जा सकता, किन्तु अवशिष्ट जो अतिथि के चान्द्रायण में निमित्तभूत अपना चाण्डाल
वृत्तान्त है, उसे मैं देखूँगा