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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

तदात्मश्वपचोदन्तं द्रष्टुं तावदखिन्नधीः । भूतमण्डलपर्यन्तग्रामं गच्छामि सत्वरम् ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

में अपने उस चाण्डाल वृत्तान्त को देखने के लिए खेदरहित होकर भूतमण्डल देश की सीमा में स्थित ग्राम में शीघ्र जाता हू