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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

इति संचिन्तयन्गन्तुं मण्डलान्तरमादरात् । उत्तस्थौ भास्करः पार्श्वं मेरोर्द्रष्टुमिवोद्यतः ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

ऐसा विचार कर रहे गाधि मण्डलान्तर को जाने के लिए उद्यत होकर जैसे सूर्य मेरु के पार्वभाग को देखने के लिए उदित होते हैं वैसे ही उठे