Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
विनिर्गत्याभवन्मार्गे प्रावृडोघजवेन सः ।
देशानुल्लंघयामास बहून्वाततुरङ्गवत् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
गाधि घर से निकल कर मार्ग में वर्षा
ऋतु के जल प्रवाह के वेग से त्वरायुक्त हुए। उन्होने वाततुरंगम के (वायु ही जिसका वाहन है यानी मेघ
के) तुल्य बहुत से देशों को लाँध डाला