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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 58

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 58 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 58

संस्कृत श्लोक

पुत्रपौत्रसुहृद्भृत्यबन्धुस्वजनपेटकम् । यस्यातिविस्तीर्णमभूत्पत्रवृन्दं तरोरिव ॥ ५८ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसका वृक्ष के पत्र समूह की नाई पुत्र, पौत्र, सुहृद, चाकर और बन्धु-बान्धवों का संघ अति विस्तृत हुआ