Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
एतद्वारिककुबूव्योमवतीं वसुमतीमिमाम् ।
अन्यामिव पुनः पश्यन्विस्मयं परमं ययौ ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वानुभूत जल, दिशा और आकाशवाली इस पृथिवी
को फिर अन्य-सी देख वे परम विस्मय को प्राप्त हुए