Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
कोऽहं किमिव पश्यामि किमकार्षमहं किल ।
एवं विचारयंश्चित्रं सभ्रूभङ्गमभूत्क्षणम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
मैं कौन हूँ क्या देखता हूँ, मेने क्या किया यों
क्षण भर भ्रूभंगपूर्वक अन्दर विचार करते हुए स्थित रहे