Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
यस्तत्रार्थं परिज्ञाय जनैर्दूरे निराकृतः ।
यथा राशिरनर्थस्य यथा ग्रामे विषद्रुमः ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ यथार्थ वृत्तान्त जानकर लोगों ने जिसे ऐसे ही दूर कर दिया जैसे कि लोग
अनर्थ की राशि को दूर कर देते हैं और जैसे ग्राम में विष वृक्ष को दूर कर देते हैं