Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
ततो जनेऽग्निं प्रविशत्यात्मना यो हुताशनम् ।
आर्यतामार्यसंसर्गादागतः प्रविवेश ह ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त लोगों
के अग्नि में प्रवेश करने पर आर्यो के संसर्ग से आर्यता को प्राप्त हुआ वह स्वयं अग्नि में प्रविष्ट हुआ