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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 47, Verse 63

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 47, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 47 · श्लोक 63

संस्कृत श्लोक

किं त्वमेव प्रयत्नेन श्वपचं पृच्छसि प्रभो । किं ते बन्धुरसौ कच्चिदभवस्त्वं स्वतोऽथवा ॥ ६३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो, आप इतने प्रयास से चाण्डाल को क्यों पूछते हे, क्या वह आपका बन्धु था या आप स्वयं उसके बन्धु हो गये ?