Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अत्र तद्बालनिःश्वासरणद्वंशप्रवृत्तवत् ।
गीतं पीतं शुनीरक्तं साधिता शवभूषितः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ पर उन बालकों
के साँस से बजते हुए बंसी के ताल स्वर के समान गान किया था, कुत्ती का रुधिर पीया था और मुर्दे को
सजानेवाली वस्तुओं से सबकी सजावट की थी