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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 48, Verses 19–20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 48, verses 19–20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 48 · श्लोक 19,20

संस्कृत श्लोक

नागरा ऊचुः । अभूदिहाष्टौ वर्षाणि श्वपचो भूमिपो द्विज । राजत्वमर्पितं यस्य नाम मङ्गलहस्तिना ॥ १९ ॥ अन्ते च संपरिज्ञातः स प्रविष्टो हुताशनम् । अद्य द्वादशवर्षाणि समतीतानि तापस ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

नागरिक लोगों ने कहा : हे द्विज, यहाँ आठ वर्ष तक चाण्डाल राजा हुआ, जिसको मंगल हस्ती ने राजा बनाया था अन्त में स्वरूप ज्ञात होने पर अग्नि में जल गया । हे तपस्विन्‌, आज इस बात को हुए बारह वर्ष बीत गये हैं